स्वास्थ्य के प्रत्ति हम सभी को जितना संवेदनशील होने कि आवश्कता है उतना अभी तक भी हम नहीं हो पाए हैं. इतना अधिक इस सम्बन्ध में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और हर एक व्यक्ति आज के समय में यह जानता है कि स्वास्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है उसके उपरांत भी हम जितना समय अपने स्वास्थ्य को देना चाहिए नहीं दे रहे हैं और उसका नतीजा यह है कि हर तीसरा व्यक्ति कुछ न कुछ व्याधि का शिकार है और जीवन का आनंद लेना एक स्वपन सा हो गया है क्यूंकि एक तो जीवन का अधिकतर समय वैसे ही भागा दौड़ी में बीत रहा है और उस पर स्वास्थ्य के सम्बन्ध में हम सभी कि लापरवाही कहीं न कहीं हम सभी पर भारी पड़ रही है. हमारी पहली प्राथमिकता स्वास्थ्य होना चाहिए जो कि नहीं है और ये सवाल हम सभी को खुद से पूछना जरूरी हो गया है कि हम दिन भर में कितना वक़्त अपने स्वास्थ्य को दे रहे हैं और कितना सुधार कर रहे हैं. आपका जीवंत होना आपके पूरी तरह से स्वस्थ होने की निशानी है , आप जितना चुस्त और दुरुस्त होंगे उतना ही जीवन के हर पहलु का आनंद ले पाएंगे. वक्त तो सबके पास बराबर ही होता है पर आपके जीवन की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि आप जीवन के हर पल को कैसे सम्पूर्ण ऊर्जावान होकर जीते हैं. हम सभी यही समझने में भूल कर रहे हैं कि जीवन के सभी रंगों को हम स्वस्थ शरीर के साथ ही महसूस कर सकते हैं ऐसे नहीं.इसलिए बस मैं यही कहना चाह रही हूँ कि प्राथमिकता के साथ अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें ताकि हर एक पल का आनन्द लिया जा सके . कभी हम सुना करते थे कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है लेकिन जब बचपन में ये पढा था तो इसको सिर्फ पढा था समझा नहीं था क्यूंकि बचपन तो कुछ और ही वक़्त होता है पता नहीं क्या मस्ती होती है और सारी दुनियां और दुनियां की हर चीज़ बहुत सुंदर और चमकती हुई नजर आती है ये पता ही नहीं होता की ये पत्थर भी हजम कर जाने वाला शरीर कभी बीमार भी हो सकता है . पढ़ने के लिए बस पढ़ते थे और कुछ नहीं. जब बड़े हुए तो बहुत कुछ समझ में आने लगा की जो दिखता था भैया उस सब से सब बहुत अलग है और हर कदम संभल कर और सोच कर रखना जरुरी है .शरीर भी संभालना है , पढाई भी करनी है , दुनियादारी भी देखनी है और भी बहुत सारी चुनौतियां हैं जो खड़ी हैं इंतज़ार में. सब कुछ साथ-साथ देखना है और संतुलन बना कर चलना है , चूक हो जाती है और कोई न कोई हिस्सा छूट जाता है पर कुछ और अगर छूट जाए तब भी कोई ज्यादा बड़ी समस्या नहीं है लेकिन अगर शरीर साथ छोड़ दे और व्याधियों से घिर जाए तो बहुत मुश्किल हो जाता है इसलिए पहली प्राथमिकता शरीर ही हो तो बेहतर है , कम पैसे में जिया जा सकता है परन्तु अस्वस्थ काया के साथ सब धरा का धरा ही रह जाता है .हम जितनी जल्दी इस सच को स्वीकार कर लेंगे उतना ही हमारे लिए अच्छा है .इसलिए पहली प्राथमिकता स्वास्थय को ही बनाना है तभी ये जीवन रूपी पुष्प खिल पायेगा और इसकी खुशबु हर तरफ होगी . जीवन सिर्फ एक बार मिलता है तो जरा सोचो कि इस कि सबसे बड़ी जरुरत क्या है मेरे हिसाब से तो यही कि खुद को भी आनंदित रखो और अपनी वजह से बाकी सब को भी क्यूंकि यही सब है जो जीवन को परिपूर्ण करता है और बाकी सब तो यहीं रह जाना है .ध्यान से सोचो जरा कि क्या है जो साथ ले जाओगे बस ये पल ही हैं जो भरपूर जी लिए तो एक मुस्कुराहट के साथ दुनियाँ से जाओगे और भरपूर जीने का मूल मंत्र वही है जो आज आप के साथ साँझा किया - एक निरोग काया से बढ़कर और कोई धन नहीं है , जरा विचार करियेगा ................
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