ध्यान क्या है? कभी सोचते हो? जीवन के हर एक पल में आगे चलते हुये कभी ये सोचा है ? कभी ये विचार आता है क्या? वास्तव में ध्यान यही है हर पल को ध्यान से जीना, हर पल में जागरुक होना| हर क्षण का साक्षी बनना| बीत रहे हर क्षण में खुद को देखना यही ध्यान है|कभी चलते फिरते उठते बैठते खुद पर ध्यान दिया है कि मैं क्या कर रहा हूँ/रही हूँ| हम एक मशीन की तरह काम करते हैं और हमें यह अनुभव ही नहीं होता कि हम ने कब क्या किया| बस चलते जाते हैं एक मशीन के जैसे| हर एक क्षण में न जाने हम क्या क्या कर जाते हैं बिना अहसास के| यहाँ तक कि हम अपना पूरा जीवन ही ऐसे जी जाते हैं बेध्यानी में|हर एक क्षण को महसूस करना और जागरूक होकर चलना ध्यान है|एक उदाहरण के लिए मान लिजिये आप पानी पी रहे हैं तो कितना महसूस करते हैं आप उस क्षण को| क्या करते हैं मैं आपको बताती हूँ न क्योंकि मैं भी आप में से ही एक हूँ|हम पानी तो पी रहे हैं पर ध्यान किसी और काम में है जो अभी बाद में करना है, तो जरा सोचिए कि अभी आप जहाँ हैं और जो कर रहे हैं यानि पानी पी रहे हैं तो इस एक क्षण में आप यहीं क्यों नहीं हो सकते|जो काम करना है जिसके बारे में सोच रहे हो वो तो अभी करना है पर जो इस क्षण कर रहे हो ये क्षण तो चला जाएगा न और लौट कर नहीं आयेगा तो फिर क्यों नहीं हम इस को जी लें जी भर कर| मैंने भी शुरुआत ही की है और मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा|मैं चाहती हूँ कि मैंने जो महसूस किया आप सभी से सांझा करुं| मेरे हिसाब से ये ध्यान की शुरुआत है और मैं हर छोटे या फिर बडे़ काम में हर पल ये ध्यान रख कर चलना चाहती हूँ कि मैं एक छोटे से बीत रहे क्षण में कहाँ हूँ और क्या कर रही हूँ|ये छोटे-छोटे क्षण मिल कर ही एक सम्पूर्ण जीवन बनते हैं और हम हैं कि इनको जीना ही भूल जाते हैं|जिस क्षण में हो उसको ध्यान से ध्यान देकर बिताओ तो पूरा जीवन ही ध्यान बन जायेगा और फिर चलते -फिरते उठते-बैठते जगरूकता के साथ आगे बढ़ते हुए ये जीवन ध्यानमय हो जायेगा|बात छोटी सी है मगर बहुत काम आयेगी बस शुरुआत तो कर के देखो एक छोटी सी शुरुआत... मेरे साथ
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